21वीं सदी में समृद्धि और सुःख के लिय आवश्यक जीवनकौशल

अमरीकी प्रेजिडेंट Bill Clinton के शिक्षा सचिव, Richard Riley ने ठीक फ़रमाया था, “आज हम शिक्षार्थियों को ऐसे रोज़गार के लिए तैयार कर रहे हैं जो अभी विद्यमान नहीं हैं, ऐसी उद्योग कला के साथ जिसका अभी आविष्कार भी नहीं हुआ है, ऐसी समस्याओं के समाधान के लिए जो हम अभी जानते नहीं की समस्याएं हैं.”

लेखक Tom Friedman ने सही टिप्पणी की है की, “नौकरी चाहिए? तो उसका आविष्कार खुद करो.”

निश्चित रूप से आज वैश्विक अर्थव्यवस्था का रूप बदल रहा है पर क्या इससे मानव कल्याण में सुधर भी हो रहा है? मनोवैज्ञानिक Viktor Frankl के अनुसार, “आज मानव के पास साधन तो हैं, पर जीवन अर्थ नहीं है” (We have the means, but no meaning.)

आज की दुनिया की समस्याएं उलझी हुई नहीं हैं.
वे तो जटिल हैं.

जिगसॉ पज़ल एक उलझी हुई पहेली है. उसे सुलझाना मुश्किल तो है पर एक जिगसॉ पज़ल का एक अनोखा हल ही होता है. शतरंज एक जटिल समस्या के समान है क्योंकि वो मुश्किल भी है और उसका समाधान बहुसंखिये कारकों (multiple factors) पर निर्भर होता है.

व्यवसाय विकल्प से ले कर भूमंडलीय ऊष्मीकरण तक, आज जिन समस्याओं का सामना हम कर रहे हैं ये सब जटिल समस्याएं हैं.

तो सवाल ये है कि २१वीं सदी में उन्नति के लिए कैसी मनोवृति, कौनसे कौशल, और किस तरह की दक्षता की आवश्यकता है? आज के सामाजिक चरण परिवर्तन के तहद वह कौनसे जीवन कौशल हैं जो हमारी सामाजिक सफलता और हमारे दीर्घ कालीन सुख और कल्याण के लिए ज़रूरी हैं?

आज सामाजिक सफलता के लिए ज्ञान अर्जन अनिवार्य तो है पर पर्याप्त नहीं है.

जब ज्ञान संग्रह में तेज़ गति से वृद्धि हो रही है तो आत्म-निर्देशित शिक्षा (self-directed learning) में सक्षम होना एक मौलिक जीवन कौशल बन जाता है. आत्म-निर्देशित शिक्षा के मुख्य तत्त्व हैं स्वप्रेरणा (self-motivation), भावनात्मक लचीलापन (emotional resilience), साकारात्मक मानसिकता (growth mindset), जूनून और लगन (grit) और ढ़ृड़ संकल्प (determination), और आजीवन सीखने कि क्षमता ताकि बदलती परिस्थितयों से झूझ सकें और अपने को बार-बार reinvent कर सकें.

स्वतन्त्र, गहरी और रचनात्मक सोच, जो जटिल समस्याओं के नवीन समाधान ढूंढने में और विवेकपूर्ण निर्णय लेने में हमें सक्षम बनाये ये तो एक कालातीत कौशल है.

दूसरे को धैर्य से सुनने की क्षमता, बहु-इन्द्रिय संचार (multisensory communication), कथानात्मक और प्रबल रूप से अपने विचार प्रस्तुत करने की योग्यता – ये कौशल 21वीं सदी में सफलता के लिए अत्यंत आवश्यक हैं.

एक अकेला बुद्धिशाली व्यक्ति आज कि जटिल समस्याओं के नवीन समाधान नहीं ढूंढ सकता क्योंकि जटिल समस्याओं को सुलझाने के लिए इन समस्याओं को भिन्न परिपेक्ष्य से देखना अनिवार्य हो जाता है. इसलिए मानव-विविधता स्वीकार कर समूह में काम करने कि योग्यता (accepting diversity and ability to work in teams) और संवेदनशील सहकार्यता (empathetic collaboration) अति आवश्यक जीवन कौशल हो जाते हैं.

एक और कालातीत जीवन कौशल है वित्तीय साक्षरता (financial literacy). इसके लिए आवश्यक है कि हम समझें विलम्बित संतुष्टि (delayed gratification) क्या है, कैसे विलम्बित संतुष्टि के लिए आत्म-संयम (self-control) ज़रूरी है, जोखिम और इनाम (risk and reward) का क्या तालमेल है और निवेश कैसे करते हैं। समाज कल्याण के लिए हमें यह भी समझना चाहिए की हम अपनी जमा पूँजी का कुछ भाग किस भांति दान करें की अधिकतम सामाजिक परोपकार हो (maximum social impact).

सबसे महत्वपूर्ण कालातीत जीवन कौशल है आत्म-बोध (self-awareness). कैसे हम निष्काम कर्म करें और ऐसे जीवन लक्ष्य साधें जो हमारे निजी स्वार्थ से बहुत बढ़कर हों ताकि हमारा चित्त शान्त, संतुष्ट और समभाव में रहे, और हम निरंतर परम आनंद में अपना जीवन व्यतीत कर सकें.

२१वीं सदी कि शिक्षा का उद्देश्य होना चाहिए कि शिक्षार्थी इन कालातीत जीवन कौशल में निपुणता हासिल करें ताकि आंतरिक उत्साह, जोश और संवेदनशीलता के साथ समाज कल्याण में लीन वे सामाजिक सफलता और दीर्घकालीन सुःख प्राप्त कर सकें.

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