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स्कूल के ब्लैकबोर्ड पर लिखा स्वागत संदेश

मेरी कहानी: विद्यार्थियों के साथ सह-शिक्षार्थी

यह सफ़र 2010 में चंपावत के एक गाँव के स्कूल से शुरू हुआ। तब से ग्रामीण भारत के विद्यार्थियों और शिक्षकों के साथ सीखते हुए मैंने समझा कि शिक्षा के दो सूत्र हैं: एक, पाठ्यक्रम यानी syllabus, जो व्यवस्था हमसे अपेक्षा करती है; और दूसरा, सीखने की ललक, सीखते रहने की क्षमता और सार्थक जीवन जीने के कौशल। मैं मानता हूँ कि भविष्य जैसा भी हो, दो तरह के कौशल हमेशा ज़रूरी रहेंगे: वे जो शिक्षार्थी को जीविका के लिए तैयार करें, और वे जो उन्हें जीवन के लिए तैयार करें। इस वेबसाइट के सभी संसाधन इसी दूसरे सूत्र पर केंद्रित हैं और विद्यार्थियों को जीवन और जीविका, दोनों के लिए आवश्यक कौशल विकसित करने का प्रयास है। अतुल पंत

मेरी सोच कैसे बदली

  1. 2010
    सीखने की ललक

    सीखने की ललक

    2010 में मुझे चंपावत के कुछ ग्रामीण स्कूलों में जाने का मौका मिला। वहाँ मैंने देखा कि बच्चों में सीखने की जबरदस्त ललक है, लेकिन सही मार्गदर्शन और अवसरों की कमी है। यहीं एक विचार का बीज पड़ा।

  2. 2010
    Vertical skills, Horizontal skills

    Vertical skills, Horizontal skills

    उस समय मैं एक e-learning कंपनी चला रहा था, पहले सिंगापुर में और फिर लंदन में। UEFA, WWF और WHO जैसी कंपनियों और संस्थाओं के वरिष्ठ लोगों से मिलना-जुलना होता था। हर व्यक्ति के पास कोई विशेष ‘vertical’ skill थी, जैसे marketing, communication या finance। लेकिन कुछ ‘horizontal’ skills ऐसी थीं जो लगभग सभी में समान थीं। इन्हीं horizontal skills को खोजना और समझना मेरा जुनून बन गया।

  3. 2010
    “Timeless” क्यों

    “Timeless” क्यों

    रिसर्च करते हुए मुझे ‘life skills’ शब्द मिला। लेकिन life skills की सूचियों में खाना बनाना और सुरक्षित रूप से सड़क पार करना जैसी चीज़ें भी शामिल थीं। इसलिए मैंने इसमें Timeless/कालातीत शब्द जोड़ा। इसमें मेरे योग-अभ्यास और भारतीय दर्शन में मेरी रुचि की झलक भी थी।

  4. 2010–12
    पढ़ाकर पढ़ाना सीखा

    पढ़ाकर पढ़ाना सीखा

    मैं कोई trained teacher नहीं हूँ। इसलिए हर भारत यात्रा में, जो भी स्कूल बुलाता, प्राइवेट, सरकारी या पब्लिक, वहाँ मैं workshop करता। ताकि बिना किसी डिग्री के, टीचर बनना सीखने का समय कम हो सके।

  5. 2011–12
    Fire Up the Learner Within

    Fire Up the Learner Within

    पहले इसी नाम की workshop बनी, और बाद में मेरी पहली self-published ebook। यह अब तक के अनुभवों को समझने और व्यवस्थित करने का मेरा तरीका था, अपने लिए एक मज़ेदार ‘performance of understanding’। बाद में मैंने दूसरी ebook भी लिखी: Only the Curious Shall Thrive।

  6. 2013
    शिक्षा के दो सूत्र

    शिक्षा के दो सूत्र

    प्रख्यात शिक्षाविद् प्रो. एम. एम. पंत के साथ बातचीत से RGB Skills जैसे विचार निकले: सीखने की ललक • सीखना सीखें • जीने की कला DNA की दो strands की तरह, मैंने औपचारिक शिक्षा को शिक्षा का पहला सूत्र और Timeless Lifeskills को दूसरा सूत्र मानना शुरू किया।

  7. 2012–19
    जीवनशाला, गाँव माड़म

    जीवनशाला, गाँव माड़म

    जीवनशाला विद्यालय, जो अब बंद हो चुका है, अल्मोड़ा से लगभग 50 km दूर तीन कमरों का एक छोटा-सा स्कूल था। उसे दो युवा बहुत सीमित साधनों में चला रहे थे। बार-बार वहाँ जाकर मैंने तरह-तरह के प्रयोग किए, जैसे field trips और स्कूल का अपना अख़बार: बच्चे काग़ज़ पर अपना लेख लिखते और chart paper पर चिपकाते थे। फिर tablets आए, जिनसे stop-motion animation बनाकर सीखना मज़ेदार बनाया। उसके बाद छोटे electronic components और circuits के साथ tinkering शुरू हुई, और फिर robotics तक पहुँच गए।

  8. 2012–19
    Workshops: पहले जिज्ञासा जगाओ

    Workshops: पहले जिज्ञासा जगाओ

    11 साल और उससे बड़े विद्यार्थियों के लिए लगभग 90 मिनट की hands-on workshops: Thinking like a Scientist, Thinking like an Engineer, Tinkering with Electronics, Electronic Art & Craft, Robotics, e-Textiles, Animation & Film-making, Citizen Journalists, User Manual of Me और Web Quests। शिक्षकों के लिए थी Fire Up the Learner Within। मूल विचार सरल था: पहले उनका ध्यान खींचो, उन्हें चकित करो और सीखने की इच्छा जगाओ।

  9. 2015
    K: एकलव्य से प्रेरित एक लड़का

    K: एकलव्य से प्रेरित एक लड़का

    Self-directed learning की बात शुरू करने का मेरा पसंदीदा तरीका एकलव्य की कहानी थी। मैं बच्चों से पूछता: क्या द्रोणाचार्य की मिट्टी की मूर्ति ने एकलव्य को तीरंदाज़ी सिखाई? बच्चे कहते: नहीं। फिर वे खुद बताते कि उसे किसने सिखाया: एकाग्रता, दृढ़ निश्चय, रुचि और बार-बार कोशिश करते रहने की क्षमता। कई साल बाद यही विचार K नाम के एक लड़के की eComic बना, जिसे Indiegogo पर launch किया।

  10. 2018 से आगे
    STEM 2.0

    STEM 2.0

    अब ध्यान STEM 2.0 पर गया: Scratch से coding, robotics, IoT, drones, 3D printing, AR और VR। micro:bit जैसे सस्ते, open-source टूल्स महँगी किट्स से बेहतर साबित हुए।

  11. 2020–21
    कोविड के दौरान ऑनलाइन सीखना

    कोविड के दौरान ऑनलाइन सीखना

    जब कोविड के कारण स्कूल बंद हुए, तब तक मैं वापस सिंगापुर आ चुका था। कक्षाएँ ऑनलाइन चली गईं और एक नई पहल शुरू हुई: Forever Learning। अलग-अलग स्कूलों के विद्यार्थी, अपने-अपने घरों से, मिलकर animated stories बनाते थे। कोई script लिखता, कोई animation बनाता, कोई BandLab जैसे apps से music तैयार करता और कोई final video edit करता। हमने उस समय चल रहे NASA के Mars Mission को भी समझा, और मैंने misinformation तथा deepfakes पर एक course चलाया। हर हफ़्ते Get Mentored sessions में हज़ारों विद्यार्थी Zoom पर अलग-अलग क्षेत्रों के mentors से मिलते। यह कुछ हद तक हमारी पुरानी Cut to the Chase series जैसा था, जिसमें बच्चे एक writer, radio jockey, fashion designer, film director और दूसरे professionals की ज़िंदगी के एक दिन की झलक देखते थे। जनवरी 2024 में मेरी पत्नी की नौकरी हमें सिंगापुर से ऑस्ट्रेलिया ले आई। अब तक मैं छह देशों में रह और काम कर चुका हूँ: भारत, रूस, सिंगापुर (दो बार), जापान, UK और ऑस्ट्रेलिया। आगे कहाँ?!

  12. 2012–2026
    कच्छ से असम तक, तवांग से नागरकोइल तक

    कच्छ से असम तक, तवांग से नागरकोइल तक

    इन वर्षों में मैंने भारत के एक छोर से दूसरे छोर तक ग्रामीण स्कूलों के साथ काम किया है: पश्चिम में गुजरात के कच्छ से पूर्व में असम तक, और उत्तर में अरुणाचल प्रदेश के तवांग से दक्षिण में तमिलनाडु के नागरकोइल तक। Workshops करने और TLS Labs तथा Clubs शुरू करने के अलावा, मैंने 9 स्कूलों को भारत सरकार की Atal Tinkering Lab grant हासिल करने में मदद की। कई स्कूलों और विद्यार्थियों को MANAK जैसे प्रतिष्ठित programmes और awards में भाग लेने और सफल होने के लिए भी मार्गदर्शन दिया।

  13. 2026–
    आगे: AI और स्वयं को जानना

    आगे: AI और स्वयं को जानना

    युवा विद्यार्थियों के लिए AI की मदद से सीखना अधिक रोचक और मज़ेदार बनाना, और बड़ों के लिए AI को personal tutor की तरह इस्तेमाल करना, लेकिन अपनी सोचने की क्षमता AI को सौंपे बिना। और साथ ही, स्वयं को जानना, जो सबसे महत्वपूर्ण Timeless Lifeskill है।

  14. जीविका के लिए तैयार, जीवन के लिए तैयार

    जीविका के लिए तैयार, जीवन के लिए तैयार

    लक्ष्य हमेशा यही रहा है कि युवा दोनों तरह से तैयार हों: Future-ready: तेज़ी से बदलती अर्थव्यवस्था में काम करने और अपनी जीविका बनाने के लिए। Life-ready: स्वस्थ रहने, अच्छे संबंध बनाने, संतुलित रहने और आनंदपूर्ण, सार्थक जीवन जीने के लिए। इसके लिए केवल जानकारी नहीं, बल्कि बुनियादी प्रवृत्तियाँ, सही दृष्टिकोण और उपयोगी skills व competencies विकसित करना ज़रूरी है।

  15. हमेशा
    जो लोगों के साथ रह जाता है

    जो लोगों के साथ रह जाता है

    अच्छी शिक्षा का असर मापना मुश्किल है। परीक्षा और अंक शायद भविष्य की सफलता के सबसे खराब पैमानों में से हैं, सफलता की आपकी परिभाषा चाहे जो हो। इतने वर्षों बाद कभी-कभी पुराने students मिलते हैं और बताते हैं कि TLS workshop में सीखी कोई बात वर्षों बाद भी उनके काम आ रही है। शिक्षक अक्सर कहते हैं कि workshops से भी अधिक उन्हें मेरी ऊर्जा और उत्साह प्रेरित करते हैं, और यह भी कि मैं बार-बार लौटकर आता हूँ! यह सब बहुत संतोष देता है। और Timeless Lifeskills ने इन वर्षों में मुझे जितना सिखाया है, उसके लिए मेरे मन में गहरी कृतज्ञता है।

  16. आभार

    आभार

    • मनन, मेरा बेटा, जो 12 साल की उम्र से मेरे साथ workshops चलाता आया है।
    • पूजा, मेरी cousin, Cut to the Chase की co-creator और comic book The Adventures of K की लेखिका, जिन्होंने कच्छ के TWES और रायबरेली के पास SDSN में भी workshops चलाईं।
    • शालिनी, मेरी sister-in-law, जिन्होंने Isha Vidhya schools और SDSN में कई workshops और challenges चलाए, और कोविड के दौरान online courses भी कराए।
    • अरविंद, मेरे cousin और video series ब्रह्मांड का अद्भुत इतिहास के co-creator।
    • वंदिता, मेरी पत्नी और इस पूरे प्रयास की रीढ़। उनके आर्थिक और भावनात्मक सहयोग के बिना TLS संभव नहीं होता।

    रंजन जी, ललित जी, तारा दत्त जी, कल्याण जी, थिलगा अक्का, बरनी अन्ना, अमित, आनंद, कुश, मेहुल, अदिति और उन अनेक लोगों का भी दिल से धन्यवाद, जिन्होंने इस यात्रा में मेरा साथ दिया और Timeless Lifeskills को आकार देने में योगदान किया।

Workshops

जीवनशाला में workshop, जून 2014
मंजुश्री विद्यापीठ, तवांग में tinkering workshops
3D game-design workshop की एक झलक
Workshop अभी भी जारी है!
Scribbler bot
DC motor को generator की तरह इस्तेमाल करना
Propeller से चलने वाली गाड़ी
2010 से अब तक की workshop रिपोर्ट (English) →

लोग क्या कहते हैं

अख़बारों में Timeless Lifeskills workshops पर अख़बारों के लेख
विद्यार्थियों के धन्यवाद संदेश
“हमारा साथ देने के लिए धन्यवाद”
“हमारा साथ देने के लिए धन्यवाद” · ईशा विद्या टीम
1 / 6
20+
छह राज्यों के ग्रामीण स्कूल
25 लाख+
YouTube पर वीडियो व्यूज़
14 साल
ग्रामीण कक्षाओं में